1st Epi – Qayamat Se Qayamat Tak 29th January 2024
पहला दृश्य
पूर्णिमा प्रार्थना करती है कि आज का दिन धन्य हो। वह कहती है अगर फूल अच्छे से बिक गए तो मैं रति की स्कूल फीस भर सकती हूं। डॉ. अनीश रास्ते में हैं। वह एक दुर्घटना देखता है। वह व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देता है। वह कहता है कि यह एक बड़ा दिल का दौरा है। पूर्णिमा भुमिका से पूछती है कि क्या हुआ। वह कहती है कि मेरा अजन्मा बच्चा नहीं हिल रहा है। वह रोती है। डॉ. अनीश उस आदमी को सीपीआर देता है। वह कहता है कि जीवन इतनी आसानी से हमें छोड़ नहीं देता। पूर्णिमा भुमिका को पत्ता देती है और उसे प्रार्थना करते रहने के लिए कहती है। डॉ. अनीश उस आदमी को सीपीआर देता है। वह सांस लेता है। भुमिका का बच्चा हिलता है। वह पूर्णिमा को गले लगा लेती है। रास्ते में डॉ. अनीश पूर्णिमा को फूलों के खेतों में देखता है। वह वहां काम कर रही महिलाओं को देखता है और चला जाता है।
दूसरा दृश्य
रात में, अनीश की माँ कहती हैं कि सब कहाँ हैं? हमें पूजा के लिए जाना है। उसकी बेटी कहती है कि मैं यहां हूं। सुमित्रा कहती है कि अनीश कहाँ है? उसका भाई कहता है कि वह अस्पताल चला गया। वह कहती है कि वह कुछ ही दिनों के लिए यहां था लेकिन वह यहां भी काम कर रहा है। डॉ. अनीश जा रहे हैं। नर्स उसे डिलीवरी इमरजेंसी के लिए रोकती है। वह कहता है लेकिन मैं स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हूं। वह कहती है कि महिला को दमा का दौरा पड़ा है। कृपया हमारी मदद करें।
पूर्णिमा बाजार में फूल बेचती है। बाजार में तूफान आता है। जीजी सुमित्रा से कहती हैं कि यह तूफान अपने साथ कुछ काला लेकर आएगा। यह अच्छा संकेत नहीं है। बाबू जी आते हैं। वह पूछता है कि यहां क्या हो रहा है? सुमित्रा कहती है कि चलो कार में मंदिर चलते हैं। वह कहता है कि मैं कभी कार में मंदिर नहीं जाता। इस घर की बहुओं को तय करने की जरूरत नहीं है। सुमित्रा जीजी की तरफ देखती है। वह कहती है कि यह तूफान अगली बार क्या होने वाला है इसका संकेत दे रहा है। सुमित्रा रास्ते में परेशान है। वह देवांग से पूछती है कि राज कहाँ है? जीजी कहती हैं कि तूफान बता रहा है कि आगे क्या होने वाला है। राज आता है और अपनी माँ से मिलता है। वह खुश हो जाती है।
तीसरा दृश्य
पूर्णिमा भी मंदिर आती है। वह फूल बेचती रहती है। राज भी मंदिर के बाहर बाजार में आता है। वह पूर्णिमा को फूल बेचते देखता है। वह उसके पास आता है। उसकी पल्लू उसकी घड़ी में फंस जाती है। राज नहीं देख सकता। पूर्णिमा उसके साथ खींची जाती है। वह उसे रोकने की कोशिश करती है लेकिन वह नहीं सुन पाता। वह पूर्णिमा के साथ मंदिर में प्रवेश करता है। वह अपनी पल्लू निकलती है। उसका ब्रेसलेट उसकी पल्लू में फंस जाता है। राज उसकी तरफ देखता है। वे पूजा करते हैं। पूर्णिमा चली जाती है। राज सोचता है कि वह कौन है।
दामयंती कुंडली देखती है और कहती है कि राज को सावधान रहने की जरूरत है। सितारे उसके लिए अच्छे नहीं हैं। यहां तक कि यह उसे मार भी सकता है।
चौथा दृश्य
पूर्णिमा घर आती है और अपनी बहन से मिलती है। पूर्णिमा घर आती है और देखती है कि उसकी माँ संबू को पीट रही है। वह कहता है कि इन कागजों पर हस्ताक्षर करो। गांव में सभी ने हस्ताक्षर किए हैं। पूर्णिमा की माँ ग्रामीणों को कोसती है